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डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम: मिसाइल मैन से राष्ट्रपति तक का प्रेरणादायक सफर 

प्रस्तावना: एक साधारण शुरुआत से असाधारण सफर

"सपने वो नहीं जो आप नींद में देखें, सपने वो हैं जो आपको सोने न दें।"
ये शब्द भारत के सबसे प्रिय वैज्ञानिक और 11वें राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन दर्शन को पूरी तरह से दर्शाते हैं। एक छोटे से गाँव के साधारण परिवार में जन्मे कलाम सर ने अपनी मेहनत, लगन और जुनून से न सिर्फ भारत के मिसाइल कार्यक्रम को नई दिशा दी, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँचकर इतिहास रच दिया।

इस विस्तृत आर्टिकल में हम डॉ. कलाम के जीवन के हर महत्वपूर्ण पहलू को जानेंगे:
✅ बचपन और शिक्षा के संघर्ष
✅ वैज्ञानिक करियर की चुनौतियाँ और उपलब्धियाँ
✅ राष्ट्रपति पद तक का सफर
✅ व्यक्तित्व और जीवन दर्शन
✅ युवाओं के लिए प्रेरणादायक सीख

प्रारंभिक जीवन: संघर्षों की शुरुआत (1915-1950)

1. जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के छोटे से तटीय शहर रामेश्वरम में हुआ था। उनका पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था।

परिवार की आर्थिक स्थिति:

  • पिता जैनुलाब्दीन: नाव चलाकर मछुआरों को किराए पर नाव दिया करते थे

  • माता आशियम्मा: घर संभालने वाली साधारण गृहिणी

  • परिवार की आय बहुत कम थी, कई बार दो वक्त की रोटी का भी जुगाड़ मुश्किल होता था

2. बचपन के संघर्ष और प्रेरणादायक घटनाएँ

कलाम सर के बचपन की कुछ महत्वपूर्ण घटनाएँ जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा:

अखबार बेचने का अनुभव:

  • 8 साल की उम्र में अपने चचेरे भाई शमशुद्दीन के साथ ट्रेन से फेंके गए अखबार इकट्ठा करके बेचते थे

  • यह उनकी पहली कमाई थी जिससे वे परिवार की आर्थिक मदद करते थे

शिक्षक का प्रभाव:

  • उनके गणित शिक्षक अईयादुराई सोलोमन ने उन्हें सिखाया:
    "जीवन में तीन चीजें जरूरी हैं – इच्छा, विश्वास और उम्मीद।"

पिता की सीख:

  • उनके पिता हमेशा कहते थे:
    "मुसीबतों से घबराओ मत, उन्हें समझने की कोशिश करो।"

शिक्षा: गरीबी से लड़ते हुए (1950-1960)

1. प्रारंभिक शिक्षा

  • रामेश्वरम एलिमेंट्री स्कूल: गणित और विज्ञान में विशेष रुचि

  • रामनाथपुरम हाई स्कूल: घर से दूर रहकर पढ़ाई की

2. कॉलेज और आर्थिक संकट

  • 1954: सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातक

  • 1955: मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में दाखिला

आर्थिक चुनौती:

  • कॉलेज की फीस ₹1000 थी जो उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी रकम थी

  • उनकी बहन जोहरा ने अपने गहने गिरवी रखकर पैसे जुटाए

  • कलाम सर ने बाद में कहा: "उस दिन मैंने ठान लिया कि अपनी पढ़ाई से परिवार का नाम रोशन करूँगा"

वैज्ञानिक करियर: संघर्ष से सफलता तक (1960-2002)

1. DRDO में शुरुआती संघर्ष (1960)

  • पहला प्रोजेक्ट: होवरक्राफ्ट डिजाइन करना

  • पहली असफलता: उनका पहला प्रोटोटाइप काम नहीं कर पाया

  • सीख: "असफलता ही सफलता की पहली सीढ़ी है"

2. ISRO में उल्लेखनीय योगदान (1969-1982)

  • SLV-III प्रोजेक्ट: भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान

    • 1980 में पहली सफल लॉन्चिंग

  • गुरु: डॉ. विक्रम साराभाई से मार्गदर्शन

3. मिसाइल मैन का उदय (1983-1999)

इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP):

  1. पृथ्वी (1988): सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल

  2. अग्नि (1989): परमाणु क्षमता वाली मिसाइल

  3. आकाश (1990): हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल

  4. त्रिशूल (1992): कम दूरी की मिसाइल

उपलब्धि:

  • भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाया

  • 1998 के पोखरण-2 परमाणु परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

राष्ट्रपति पद: जनता के राष्ट्रपति (2002-2007)

1. निर्वाचन और विशेषताएँ

  • 25 जुलाई 2002: भारत के 11वें राष्ट्रपति बने

  • विशेष उपलब्धियाँ:

    • राष्ट्रपति भवन को "जनता का भवन" बनाया

    • युवाओं से सीधा संवाद कायम किया

    • "विजन 2020" दस्तावेज पेश किया

2. राष्ट्रपति पद के बाद का जीवन

  • शिक्षण और लेखन को समर्पित

  • प्रमुख पुस्तकें:

    1. विंग्स ऑफ फायर (आत्मकथा)

    2. इग्नाइटेड माइंड्स

    3. इंडिया 2020

व्यक्तित्व और जीवन दर्शन

1. सादगी की मिसाल

  • सादा जीवन, उच्च विचार

  • कभी शादी नहीं की, पूरा जीवन देश को समर्पित

2. प्रमुख उद्धरण

  1. "सपने वो नहीं जो नींद में देखें, सपने वो हैं जो नींद ही उड़ा दें।"

  2. "अगर तुम हार मानोगे, तो सफलता तुमसे हाथ धो बैठेगी।"

  3. "छोटे लक्ष्य बनाना अपराध है, महान सपने देखो।"

युवाओं के लिए सीख

  1. कठिनाइयों से न डरें: गरीबी और असफलताओं के बावजूद कभी हार न मानें

  2. शिक्षा की शक्ति: ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है

  3. देशभक्ति: देश के लिए समर्पण सर्वोपरि होना चाहिए

अंतिम विदाई और विरासत

27 जुलाई 2015: शिलांग में IIM के छात्रों को संबोधित करते हुए दिल का दौरा पड़ने से निधन

विरासत:

  • भारत सरकार ने उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को "विश्व छात्र दिवस" घोषित किया

  • कलाम सर आज भी करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं

"कलाम सर ने साबित किया कि इंसान अपनी मेहनत से किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है।"


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